
खुद को ठीक कीजिए
जो भी परेशान कर रहा है, वहीं से शुरू कीजिए: कमर या घुटनों का दर्द, अकड़े जोड़, तनाव, थका हुआ मन। हल्की गतिविधि, साँस और विश्राम शरीर को वह माहौल देते हैं जिसमें वह खुद ठीक होना जानता है।
सोहन के साथ ऑनलाइन योग कक्षाएँ · आदि का तरीक़ा
तेज़ बारिश धरती से बह जाती है। धीमी बारिश को धरती सोख लेती है। योग का अभ्यास भी ऐसा ही है।
धीमे क्यों
आज हम हर चीज़ को दौड़ की तरह देखते हैं, घर में भी और बाहर भी। जल्दी है तो फ़ायदा, ज़्यादा है तो फ़ायदा, और जो धीरे चले वह पीछे रह गया। दिन भर की दौड़ शरीर और मन को तपा देती है। धूप से आकर हम ठंडा पानी पीते हैं, गर्मी नहीं बढ़ाते। वैसे ही तेज़ी का जवाब उसके विपरीत में है: धीमा, कोमल, बिना हड़बड़ी।
कसरत भी दौड़ बन जाती है: ज़्यादा पसीना, ज़्यादा क़दम, ज़्यादा तीव्रता। फिर हम सोचते हैं कि सेहत क्यों नहीं सुधरती। धीमे अभ्यास में पसीना शायद न आए, पर शरीर से जुड़ाव गहरा मिलता है। कोमल होना कमज़ोर होना नहीं है। यह शांत ताक़त है।


सेहत किसी अच्छी चीज़ को ज़्यादा करने से नहीं, उसे सही तरीक़े से करने से सुधरती है।
मार्ग

जो भी परेशान कर रहा है, वहीं से शुरू कीजिए: कमर या घुटनों का दर्द, अकड़े जोड़, तनाव, थका हुआ मन। हल्की गतिविधि, साँस और विश्राम शरीर को वह माहौल देते हैं जिसमें वह खुद ठीक होना जानता है।

बिना जल्दबाज़ी के स्थिरता और ताक़त बनाइए। पोश्चर, गतिशीलता, संतुलन और साँस पर काम कीजिए, दीवार, कुर्सी या जो भी पास हो उसके सहारे, ताकि हर शरीर सुरक्षित अभ्यास कर सके।

ध्यान को भीतर मोड़िए। स्थिर शरीर और शांत मन के साथ प्राणायाम, मुद्राएँ और ध्यान खुद से मिलने का रास्ता बन जाते हैं।
आदि का तरीक़ा
हर अभ्यास साँस और आपके अपने गति के दायरे से शुरू होता है। आगे क्या होगा, यह आपके शरीर की आज की ज़रूरत पर निर्भर है: कभी कोई मुद्रा थामना, कभी रोज़मर्रा की कोई सरल हरकत धीरे-धीरे करना। वह कोई पारंपरिक आसन हो भी सकता है, नहीं भी।
मक़सद वही रहता है: खुद से जुड़ना, भीतर उपचार का माहौल बनाना, और उस रफ़्तार से मज़बूत होना जिसे आपका शरीर सोख सके।
किसी ख़ास सामान की ज़रूरत नहीं। जो भी पास हो, वही सहारा बन सकता है, और कुछ न हो तब भी अभ्यास उतना ही असरदार है।
जो भी पास हो
मंज़िल तक
साफ़ हो कि कहाँ जाना है: ठीक होना, मज़बूत बनना या खुद को जानना। सही दिशा हर कोशिश को मायने देती है।
मैराथन 42 किलोमीटर की होती है। उसे स्थिर रफ़्तार से दौड़ा जाता है; स्प्रिंट करने पर मंज़िल से बहुत पहले थकान घेर लेती है।
रोज़ के छोटे-छोटे क़दम, कुछ दिन की बड़ी कोशिश और फिर लंबे ठहराव से कहीं आगे ले जाते हैं।
तीनों ठीक हों तो मंज़िल दूर नहीं रहती, चाहे वह सेहत हो, करियर हो या भीतर की यात्रा।
कक्षाएँ
लचीलापन, ताक़त, संतुलन और गहरे विश्राम के लिए साप्ताहिक सत्र, जो साँस, गतिविधि और विश्राम पर टिके हैं। शुरुआती लोगों के लिए आसान विकल्पों के साथ।
चोट, स्वास्थ्य समस्या या ख़ास लक्ष्य के लिए एक-से-एक योजना: कमर और घुटनों का दर्द, जोड़ों की गतिशीलता, तनाव और चिंता, महिला स्वास्थ्य, लचीलापन और ताक़त।
पूरा दिन कुर्सी पर बैठने से रक्त-संचार धीमा पड़ सकता है और ग़लत पोश्चर बनने लगता है। साँस उथली हो जाती है, पाचन बिगड़ता है और जोड़ों में दर्द शुरू होता है। गैस, पेट फूलना और लगातार दर्द से ध्यान लगाना और खुलकर सोचना मुश्किल हो जाता है, और इंसान सबसे अच्छा काम तभी करता है जब वह स्वस्थ महसूस करे। इन लाइव टीम सत्रों में कुर्सी ही अभ्यास का हिस्सा बन जाती है, और सजगता से इस्तेमाल करने पर वही कुर्सी शरीर को ठीक होने में मदद करती है।
सभी स्तरों का स्वागत। शुल्क के लिए सोहन से संपर्क करें।
सोहन के बारे में
केंद्रीय विद्यालय, जम्मू में आठ साल की उम्र में योग शुरू किया और खुले आसमान के नीचे शवासन की शांति पहली बार महसूस की।
सीमेंस इन्फोटेक की नौकरी छोड़कर योग सिखाने का फ़ैसला किया और दिसंबर तक योग प्रशिक्षक प्रमाणन पूरा किया।
जनवरी से हर तरह के लोगों को योग सिखाना शुरू किया।
अगस्त में योग थेरेपी में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा पूरा किया।
आदि के तरीक़े से सिखाते हैं: साँस और गति।

योग सिर्फ़ शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह सही भीतरी माहौल बनाकर शरीर की अपनी उपचार-शक्ति को जगाने का तरीक़ा है।
"आदि" का अर्थ है "आरंभ"। यह शिव का भी एक नाम है, जिन्हें आदि योगी कहा जाता है।
शुरुआत
सोहन को लिखिए कि आप खुद को ठीक करना, साधना या खोजना चाहते हैं। कक्षाएँ ऑनलाइन चलती हैं, दुनिया में कहीं से भी जुड़िए।
