Aadi Yoga

कमर दर्द (बैक पेन) के लिए योग · निजी ऑनलाइन सत्र

पहले कमर दर्द को समझिए, फिर धीरे-धीरे उसे कम कीजिए।

सोहन के साथ ऑनलाइन सत्र, जो उन हरकतों और दायरों से शुरू होते हैं जिनमें आपकी कमर को आराम रहता है।


शुरू करने से पहले

डॉक्टर की सलाह से शुरू कीजिए।

पहले डॉक्टर

अभ्यास का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यही है कि पहले डॉक्टर को दिखाइए और उनकी सलाह से शुरू कीजिए। योग सत्र चिकित्सा के साथ चलते हैं, उसकी जगह नहीं लेते।

दर्द की ओर कभी नहीं

हरकत को कभी दर्द की ओर नहीं ले जाया जाता। अभ्यास उसी दायरे में रहता है जहाँ आपकी कमर को आराम रहता है।

निजी सत्र

चोट कितनी गहरी है, यह समझने के लिए एक-से-एक ध्यान चाहिए, जो समूह कक्षा में नहीं मिल सकता। कमर दर्द के लिए निजी सत्र ही सही तरीक़ा हैं।


शुरुआत कैसे होती है

सबसे पहले, आपकी कमर को समझना।

कारण

सोहन यह समझने की कोशिश करते हैं कि दर्द के पीछे क्या वजह हो सकती है।

हरकत और दायरा

वे जानते हैं कि किन हरकतों में और गति के किस दायरे में दर्द होता है।

समय

दर्द कब-कब होता है, और कब से है।

जो आसान लगता है

कौन-सी हरकतें बिना किसी दर्द के हो पाती हैं। अभ्यास यहीं से शुरू होता है।

अभ्यास उसी से शुरू होता है जो आपकी कमर पहले से बिना दर्द के कर पाती है।

सोहन एक उँगली कनपटी पर रखकर ऊपर देख रहे हैं, जैसे सोच रहे हों

अभ्यास

दर्द कम करना और ताक़त बनाना, साथ-साथ।

राहत

दर्द घटाने वाली हरकतें

ऐसे अभ्यास जो दर्द को कम करें, ताकि कमर को चैन मिल सके।

ताक़त

सहारा बनाने वाली हरकतें

ऐसे अभ्यास जो कमर को सहारा देने वाली मांसपेशियों को मज़बूत करें।

दोनों साथ-साथ और धीरे-धीरे किए जाते हैं। मांसपेशियों को हल्के से जगाया जाता है, उस जगह तक रक्त-संचार पहुँचाया जाता है, और हर हरकत दर्द-मुक्त दायरे में ही रहती है।


पूरा क्षेत्र

कमर के आसपास की मांसपेशियाँ भी मायने रखती हैं।

कोर

कोर की मांसपेशियाँ कमर को सहारा देती हैं और उसका बोझ बाँटती हैं, इसलिए उन्हें मज़बूत किया जाता है।

हैमस्ट्रिंग्स

जाँघ के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ाया जाता है।

ग्लूट्स

कूल्हे की मांसपेशियों (ग्लूट्स) को मज़बूत किया जाता है।

कमर की अकड़न

कमर की अकड़न को हल्के से ढीला किया जाता है।

क्वाड्स

जाँघ के अगले हिस्से की मांसपेशियों (क्वाड्स) पर भी काम किया जाता है।

कूल्हे

कूल्हों के क्षेत्र की अकड़न को ढीला किया जाता है।


तरीक़ा

हर हरकत, उतनी ही जितनी ज़रूरत हो।

अभ्यास में पारंपरिक योगासन, प्रॉप्स और सरल हरकतें, सभी का उपयोग होता है, और हर एक उतना ही जितना शरीर को ज़रूरत हो।

सही हरकत, सही मात्रा में, कमर के लिए मददगार होती है। ग़लत हरकत नुक़सान कर सकती है, और सही हरकत भी तब, जब उसे ज़्यादा किया जाए या ग़लत तरीक़े से किया जाए। इसलिए यहाँ हर हरकत सावधानी से होती है, और कभी ज़्यादा नहीं की जाती।

आदि के तरीक़े के बारे में पढ़ें →


सवाल

जानने लायक़ बातें।

पहले सत्र में क्या होता है?

सोहन सबसे पहले आपकी कमर को समझते हैं: दर्द के पीछे क्या वजह हो सकती है, किन हरकतों और दायरों में दर्द होता है, कब होता है और कब से है। वे उन हरकतों को भी ढूँढते हैं जो आराम से हो जाती हैं, और अभ्यास वहीं से शुरू होता है।

क्या अभ्यास में दर्द होगा?

हरकत को कभी दर्द की ओर नहीं ले जाया जाता। अभ्यास आपके दर्द-मुक्त दायरे में ही रहता है, और हर हरकत उतनी ही की जाती है जितनी आपके शरीर को ज़रूरत हो।

क्या कोई सामान चाहिए?

किसी ख़ास सामान की ज़रूरत नहीं। दीवार, कुर्सी या जो भी पास हो, सहारा बन सकता है, और जहाँ प्रॉप्स मदद करें वहाँ उनका उपयोग किया जाता है।

क्या पहले डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

जी हाँ। अभ्यास का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यही है कि पहले डॉक्टर को दिखाइए और उनकी सलाह से अभ्यास शुरू कीजिए। योग सत्र चिकित्सा के साथ चलते हैं, उसकी जगह नहीं लेते।

सत्र कैसे बुक करें?

कमर दर्द पर निजी सत्रों में काम होता है, समय तय करके, और आपके हिसाब से बनी योजना के साथ। सोहन को लिखिए और अपनी कमर के बारे में थोड़ा बताइए।


शुरुआत

सोहन को अपनी कमर के बारे में बताइए।

कुछ पंक्तियाँ लिखिए: कहाँ दर्द होता है, कब से है, और किन हरकतों में होता है। पहला सत्र वहीं से शुरू होता है।

व्हाट्सऐप पर संदेश भेजिए सोहन को लिखिए info@aadiyoga.in